छत्तीसगढ़ की 14 रियासतें
15 अगस्त 1947 के पहले छत्तीसगढ़ क्षेत्र में 14 छोटे-बड़े रियासतों का अस्तित्व था। जिन्होंने अपनी संस्कृति, प्रशासन, कला, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह सभी रियासतेें 1905 से 1933 तक छत्तीसगढ़ स्टेट एजेंसी का हिस्सा थी। 1933-1947 तक ईस्टर्न स्टेट्स एजेंसी का हिस्सा रही। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इन रियासतों का भारत संघ में विलय हुआ और आधुनिक छत्तीसगढ़ का क्षेत्र अस्तित्व में आया।
बस्तर रियासत :-
काकतीय वंश के राजा अन्नम देव ने 1324 में बस्तर रियासत की स्थापना की थी। बस्तर रिसासत को 1865 में राजा भैरम देव के शासन काल में ब्रिटिश शासन द्वारा मान्यता मिली। बस्तर रियासत की राजधानी जगदलपुर थी। बस्तर रियासत के अंतिम महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। बस्तर रियासत लगभग 13,062 वर्ग मिल क्षेत्रफल के साथ छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा रियासत था। 1 जनवरी 1948 को बस्तर और कांकेर रियासत को मिलाकर बस्तर जिला बनाया गया।
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| BASTAR RIYASAT LOGO & FLAG |
कांकेर रियासत:-
चंद्रवंशी वंश के वीरकन्हार देव ने 1385 में कांकेर रियासत की स्थापना की थी। ब्रिटिश शासन द्वारा 1865 में कांकेर के राजा नरहरदेव को कांकेर रियासत के सामन्तीय शासक की मान्यता दी गई। कांकेर रियासत की राजधानी कांकेर थी। कांकेर रियासत के अंतिम शासक महाराजाधिराज भानु प्रताप देव थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 11 अगस्त 1947 हस्ताक्षर किया। 1 जनवरी 1948 को बस्तर और कांकेर रियासत को मिलाकर बस्तर जिला बनाया गया। कांकेर रियासत अपनी आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध थी।
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| KANKER RIYASAT LOGO & FLAG |
बैरागी वंश के महंत प्रहलाद दास ने 1765 में नांदगांव रियासत कीे स्थापना की थी। ब्रिटिश शासन द्वारा 1865 में नांदगांव को रियासत का दर्जा दिया गया और महंत घासी दास को नांदगांव रियासत का फ्यूडल चीफ के रूप में मान्यता मिली। नांदगांव रियासत की राजधानी राजनांदगांव थी। महंत राजा दिग्विजय दास नांदगांव रियासत के अंतिम राजा थे। दिग्विजय दास की उम्र्र कम होने के कारण राजमाता जयंतीदेवी ने नाबालिग राजा दिग्विजय दास की ओर से भारत संघ में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर 22 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किया। 1 जनवरी 1948 में नांदगांव रियासत को दुर्ग जिले में शामिल किया गया।
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| NANDGAON RIYASAT_LOGO & FLAG |
नागवंशी राजवंश के संस्थापक लक्ष्मीनिधिराय ने 1487 में खोलवा राज्य के रूप में खैरागढ़ रियासत की स्थापना की थी। इस राजवंश के 16वें शासक खड़गराय ने 1756 में राजधानी खोलवा से हटाकर खैरागढ़ कर दिया। इस तरह खड़गराय खैरागढ़ रियासत के पहले राजा थे। अंग्रेजों ने 1865 में लालफतेह सिंह को सनद देकर फिड्यूटरी चीफ स्वीकार किया था। छत्तीसगढ़ के रियासतों में भारत संघ में शामिल होने के लिए स्वीकृति देने में खैरागढ़ रियासत पहली रियासत थी। खैरागढ़ रियासत के अंतिम शासक राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह ने 5 अगस्त 1947 को भारत संघ में शामिल होने के लिए विलयपत्र पर हस्ताक्षर किया। 1 जनवरी 1948 में खैरागढ़ रियासत को दुर्ग जिले में शामिल किया गया।
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| KHAIRAGARH RIYASAT LOGO & FLAG |
बैरागी संप्रदाय के महंत रूपदास बैरागी ने 1750 में छुईखदान रियासत की स्थापना की थी। 1863 में महंत लक्ष्मण दास को अंग्रेजों ने सामंती प्रमुख के रूप में मान्यता दी और उन्हें राजा की उपाधि दी गई। छुईखदान रियासत की राजधानी छुईखदान शहर थी। महंत ऋतुपर्ण किशोर दास छुईखदान रियासत के अंतिम राजा थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 जनवरी 1948 में छुईखदान रियासत को दुर्ग जिले में शामिल किया गया।
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| CHHUIKHADAN RIYASAT LOGO & FLAG |
राजगोड़ वंश के राजा महाबली सिंह ने 1751 में कवर्धा रियासत की स्थापना की थी। कवर्धा रियासत को 1865 में राजपाल सिंह के शासन काल में ब्रिटिश शासन द्वारा मान्यता मिली। कवर्धा रियासत की राजधानी कवर्धा शहर थी। कवर्धा रियासत के अंतिम शासक ठाकुर धर्मराज सिंह थे। जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 जनवरी 1948 में कवर्धा रियासत को दुर्ग जिले में शामिल किया गया।
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| KAWARDHA RIYASAT LOGO & FLAG |
राजगोड़ वंश के महाराज मदन सिंह ने 1625 में रायगढ़ रियासत की स्थापना की। ब्रिटिश शासन द्वारा 1867 में रायगढ़ को रियासत की मान्यता मिली और राजा घनश्याम सिंह को एडाप्शन सनद दिया गया। रियासत की राजधानी रायगढ़ शहर थी। राजा बहादुर ललित कुमार सिंह रायगढ़ रियासत के अंतिम राजा थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 11 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 जनवरी 1948 को उदयपुर, सारंगढ़, जशपुर और रायगढ़ रियासत को मिलाकर रायगढ़ जिला बनाया गया। रायगढ़ रियासत अपनी समृद्ध संस्कृति और कला के लिए प्रसिद्ध थी।
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| RAIGARH RIYASAT LOGO & FLAG |
रक्सेल राजपूत वंश के राजा कल्याण सिंह ने 1818 में उदयपुर रियासत की स्थापना की थी। जिसे 1860 में अंग्रेजों द्वारा रियासत का दर्जा प्राप्त हुआ और राजा बिन्धेश्वरी प्रसाद सिंह देव ने राजा बहादुर और सितारे हिन्द की उपाधि प्राप्त थी। उदयपुर रिसासत की राजधानी धरमजयगढ़ थी। राजा बहादुर चंद्रचूड़ प्रताप सिंह उदयपुर रियासत के अंतिम राजा थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 जनवरी 1948 को उदयपुर, सारंगढ़, जशपुर एवं रायगढ़ रियासत को मिलाकर रायगढ़ जिला बनाया गया। उदयपुर रियासत अपने वन संसाधनों के लिए प्रसिद्ध थी।
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| UDAYPUR RIYASAT LOGOG & FLAG |
राजगोड़ वंश के नरेन्द्र साय ने 1638 में सारंगढ़ रिसासत की स्थापना की थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1860 में राजा संग्राम साय के शासन काल में सारंगढ़ रियासत को मान्यता मिली। सारंगढ़ रियासत की राजधानी सारंगढ़ नगर थी। राजा नरेन्द्रचंद्र सिंह सारंगढ़ रियासत के अंतिम राजा थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 जनवरी 1948 को उदयपुर, सारंगढ़, जशपुर एवं रायगढ़ रियासत को मिलाकर रायगढ़ जिला बनाया गया।
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| SARNGARH RIYASAT LOGO & FLAG |
सूर्यवंश के राजा सुजान राय ने 18वीं शताब्दी में जशपुर रियासत की स्थापना की थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1899 में राजा प्रताप नारायण सिंह देव के शासन काल में रियासत को सामंती शासक की मान्यता मिली। जशपुर रियासत की राजधानी जशपुर नगर थी। राजा विजय भूषण सिंह देव जशपुर रियासत के अंतिम शासक थे। लेकिन भारत संघ के साथ विलय संधि पर 1 सितम्बर 1947 को ईस्टर्न स्टेट्स एजेंसी के राजनीतिक अधिकारी टीसीआर मेनन ने हस्ताक्षर किया। 1 जनवरी 1948 को उदयपुर, सारंगढ़, जशपुर एवं रायगढ़ रियासत को मिलाकर रायगढ़ जिला बनाया गया। जशपुर रियासत अपने पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध थी। जशपुर रियासत भारत संघ में शामिल होने वाली अंतिम रियासत थी।
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| JASHPUR RIYASAT LOGO & FLAG |
कोरिया रियासत की स्थापना 17वीं शताब्दी में क्षत्रिय चौहान वंश के धर्मपाल साय ने की थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1876 में राजा प्राण सिंह देव के शासन काल में कोरिया रियासत को सनद प्रदान किया गया। कोरिया रियासत की राजधानी बैकुंठपुर (कोरियागढ़ पहाड़ी) थी। कोरिया रियासत के अंतिम शासक राजा रामानुज प्रताप सिंह देव थे, उन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 7 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 नवम्बर 1948 को कोरिया, चांगभखार, सरगुजा रियासत को मिलाकर सरगुजा जिला बनाया गया। कोरिया रियासत अपने खनिज संसाधनों के लिए प्रसिद्ध थी।
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| KORIYA RIYASAT LOGO & FLAG |
रक्सेल वंश के महाराज विष्णु प्रसाद सिंह ने 1613 में सरगुजा रियासत की स्थापना की थी। ब्रिटिश सरकार ने 1899 में रघुनाथ शरण सिंह देव को सामंत राजा के रूप में मान्यता दी। सरगुजा रियासत की राजधानी अंबिकापुर थी। महाराजा बहादुर रामानुज शरण सिंह देव सरगुजा रियासत के अंतिम शासक थे। उन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 9 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 नवम्बर 1948 को कोरिया, चांगभखार, सरगुजा रियासत को मिलाकर सरगुजा जिला बनाया गया। सरगुजा रियासत अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी।
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| SARGUJA RIYASAT LOGO & FLAG |
चांगभखार (चांग भाखर) रियासत की स्थापना 1790 में कोरिया राज्य से जमीदारी के रूप में की गई थी। इसके पहले शासक चौहान अग्निकोल राजपूत वंश के जोरावर सिंह थे। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1899 में महाबीर सिंह देव के शासन काल में चांगभखार रियासत को सामंती रियासतों के रूप में मान्यता दी गई। चांगभखार रियासत की राजधानी भरतपुर थी। चांगभखार रियासत के अंतिम शासक भैया कृष्ण प्रताप सिंह देव थे, जिन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। 1 नवम्बर 1948 को कोरिया, चांगभखार, सरगुजा रियासत को मिलाकर सरगुजा जिला बनाया गया। चांगभखार रियासत अपने कृषि उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थी।
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| CHANGBHAKAR RIYASAT LOGO & FLAG |
राजगोंड वंश के हरि एवं गुजर ने सक्ति रियासत की स्थापना की थी। ऐसा माना जाता है कि सक्ति रियासत की स्थापना 1625 में हुई थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा 1867 में राणा रणजीत सिंह को सनद देकर सामन्तीय शासक के रूप में मान्यता दी गई। सक्ति रियासत की राजधानी सक्ति थी। राणा लीलाधर सिंह सक्ति रियासत के अंतिम राजा थे, उन्होंने भारत संघ के साथ विलय संधि पर 15 अगस्त 1947 को हस्ताक्षर किए। सक्ती रियासत को बिलासपुर जिले में शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ के 14 रियासतों में सक्ती रियासत (मात्र 138 वर्ग मील) क्षेत्रफल में सबसे छोटी रियासत थी।
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| SAKTI RIYASAT LOGO & FLAX |
छत्तीसगढ़ रियासतों के अंतिम शासक -
- ऽ बस्तर रियासत के अंतिम शासक राजा प्रवीरचंद्र भंजदेव थे ।
- ऽ महाराजाधिराज भानु प्रताप देव कांकेर रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ नांदगांव रियासत के अंतिम शासक महंत राजा दिग्विजय दास थे।
- ऽ राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह खैरागढ़ रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ छुईखदान रियासत के अंतिम शासक महंत राजा ऋतुपर्ण किशोर दास थे।
- ऽ ठाकुर धर्मराज सिंह कवर्धा रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ रायगढ़ रियासत के अंतिम शासक राजा बहादुर ललित कुमार सिंह थे।
- ऽ राजा बहादुर चंद्रचूड़ प्रताप सिंह उदयपुर रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ सारंगढ़ रियासत के अंतिम शासक राजा नरेन्द्रचंद्र सिंह थे।
- ऽ राजा विजय भूषण सिंह देव जशपुर रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ कोरिया रियासत के अंतिम शासक राजा रामानुज प्रताप सिंह देव थे।
- ऽ महाराजा बहादुर रामानुज शरण सिंह देव सरगुजा रियासत के अंतिम शासक थे।
- ऽ राणा लीलाधर सिंह सक्ति रियासत के अंतिम राजा थे।
- ऽ चांगभखार रियासत के अंतिम शासक भैया कृष्ण प्रताप सिंह देव थे।
सूचना - यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर बनाया गया है। जिसमें गलती होने की संभावना है। जरूर नहीं यह 100 प्रतिशत सही हो।














